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अबकी जिताइ के देखा हो पंचो

abki jitai ke dekha ho pancho

रामजियावान दास ‘बावला’

रामजियावान दास ‘बावला’

अबकी जिताइ के देखा हो पंचो

रामजियावान दास ‘बावला’

और अधिकरामजियावान दास ‘बावला’

    अबकी जिताइ के देखा हो पंचो सरगे में सीढ़ी लगाय देबै।

    मन्त्री अगर बन गइली कहीं तौ पत्थर पर दूब उपजाय देबै॥

    माना माना हमार बाय दावा। पहिले तूँ हमके विधायक बनावा।

    हावा लागी गरीबी रचिको यूपी बिहार चमकाय देबै॥

    पहिले गरीबन के घर बनवाइब। कल पैखाना सुलभ करवाइब।

    रोजी रोटी लाला पड़ी ना सर्विस में सबके लगाय देबै॥

    रिश्वत कमीशन धन्धा ओराई। कतहूँ केहू के केहू सताइ।

    आवागमन रही समस्या पुलिया पुल बनवाय देबै॥

    परती बंजर भीटा बटाइब। सीलिंग कब्जा तुरंतै हटाइब।

    आतंकवादिन चारा चली ना जेहल सबै ठुंसवाय देबै॥

    हिन्दू मुसलमान सिक्ख इसाई। आपस में मिल के रही भाई भाई।

    दंगा होइ प्रशासन के देखब गंगा के उल्टी बहाय देबै॥

    सगरी असिंचित के सिंचित बनाइव। एतना करब ना तौ मुँह ना देखाइब।

    किस्मत अगर 'बावला' साथ देही पानी में आगी लगाय देबै॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : गीत मंजरी
    • संपादक : हरिराम द्विवेदी, जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
    • रचनाकार : रामजियावान दास ‘बावला’
    • प्रकाशन : सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2021

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