सीतल चन्दन अंग लगावधि
sital chandan ang lagavadhi
(बारहमासा)
सीतल चन्दन अंग लगावधि कामिनि करत सिंगार
जहिया से हरि मधुपुर तेजल सुखक मास असाढ़
आबे हो मास असाढ़ मोहनमा के मनाय आनू गे
एक ते हम्मर बारि उमरिया दोसर पिया परदेस
तेसर बुन्द रिमियो झिमि बरसय सावन अधिक कलेस
आवे हो सावन अधिक कलेस रे मोहनमा के मनाय आनू गे
भादव हे सखि बूंद झर-झर चौदिस रैन अन्हार
आजु हमर गृह कन्तो जँ रहितथि लेसितौं दीप अकास
आबे हो लेसितौं मे दीप अकास
आसिन हे सखि आस लागल छल आसो ने पुरल हमार
इहो दुःख पड़िहान कुबजी सौतिनिया कें जे पिया राखलि लोभाय
आबे हो मोहनमा के मनाय आनू गे
कार्तिक हे सखि पर्व लगै अछि सब सखी गंगा नहाय
हमहु अभागलि सामरि तिरिया किनका आहरि हैबै ठाढ़
आबे हो मोहनमा के मनाय आनू गे
अगहन हे सखि सारी लबिये गेल साठियो धान
लबैत लबैत जौबन लबि गेल बारि उमेरि
आबे हो मोहनमा के मनाय आनू गे
पूसहि हे सखि फूह पड़े छै भीजि गेल सब रंग
कुबजी संग बंसिया बजावै नैना से बहै नीर
आबे हो झहरै नीर रे मोहनमा के मनाय आनू गे
माघहि हे सखि पाला गिरै छै सब सखि रुइया धुनाय
रुइया जे धुनि-धुनि सिरका भराओल बिन हरि जाड़ो न जाय
आबे हो जाड़ो न जाय
फागुन हे सखि फगुआ के दिन छल सब सखि रंग उड़ाय
आजु हमर गृह कन्तो जँ रहितथि राखितौं मे रंग डुबाय
आबे हो राखितौं मे रंग डुबाय
चैत है सखि फूल फूलिये गेल फूलि गेल बेलियो फूल
अही फुलबाकेर हार बनाएब भेजब हरि के सन्देश
आबे हो भेजब हरि के सन्देश
बैसाख हे सखि बँसबा कटाओल ऊँच के मड़बा बनाएब
ओहि मइबा मे हम पिया सूतब अँचरा से बेनिया डोलायब
आबे हो अँचरा से बेनिया डोलायब
जेठ हे सखि हेठ भेल बरखा पूरि गेल बारहो मास
दुखहि सुख हम मनहि गमाओल कहब मे पिया के बुझाय
- पुस्तक : मैथिली लोकगीत (पृष्ठ 365)
- संपादक : अणिमा सिंह
- प्रकाशन : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
- संस्करण : 1993
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