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गे दैया आयल बरसा समैया

ge daiya aayal barsa samaiya

अज्ञात

अज्ञात

गे दैया आयल बरसा समैया

अज्ञात

और अधिकअज्ञात

    ग्रीषम समय गेला मधुबन मोहन

    रंगमहल सोहावै गे दैया

    आयल बरसा समैया

    बरिसय मेघ दमसै दामिनी

    वनमे बोलय कोइलिया गे दैया

    आयल बरसा समैया

    आयल पावस विरहा सताबै

    भोजन भवनो भावै गे दैया

    आयल बरसा समैया

    मोहन रास रचल वृन्दावन

    रहल मधुपुर छैया गे दैया

    आयल बरसा समैया

    एक बैरी भेल कृष्ण कन्हैया

    दोसरे शरत के अवैया गे दैया

    आयल बरसा समैया

    अपनो आबै लिखि पठाबै

    कुबड़ी राखल लोभैया गे दैया

    आयल बरसा समैया

    कहय सूर सुनू ब्रज बनिता

    आबि कए मिलत कन्हैया गे दैया

    आयल बरसा समैया

    स्रोत :
    • पुस्तक : मैथिली लोकगीत (पृष्ठ 338)
    • संपादक : अणिमा सिंह
    • प्रकाशन : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1993

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