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कनौजी लोकगीत : लाओ री आजी मोरी, सतुआ, गुड़ औ लडुआ

kanauji lokgit ha lao ri aaji mori, satua, guD au laDua

अन्य

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रोचक तथ्य

संदर्भ—बटु की काशी जाने की इच्छा।

लाओ री आजी मोरी, सतुआ, गुड़ लडुआ,

जइऐं हम कासी बनारस, बेद पढ़ि अइऐं।।1।।

कहाँ ते लामैं मेरे लाल, सतुआ, गुड़औ लडुआ,

घरईं आजा तोरे, बेदिया पढ़ि लेव।।2।।

लाओ माया मोरी, सतुआ, गुड़ और लडुआ,

जइऐं हम कासी बनारस, बेद पढ़ि अइऐं।।3।।

कहाँ ते लामैं मेरे लाल, सतुआ, गुँड़औ लडुआ,

घरईं अहैं बेदवार, बेद पढ़ि लेव।।4।।

स्रोत :
  • पुस्तक : हिंदी के लोकगीत (पृष्ठ 235)
  • संपादक : महेशप्रताप नारायण अवस्थी
  • प्रकाशन : सत्यवती प्रज्ञालोक
  • संस्करण : 2002

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