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भोजपुरी लोकगीत : सोने मउरि लागि रूसेले कवन दुलहा

bhojapuri lokgit ha sone mauri lagi rusele kawan dulha

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रोचक तथ्य

संदर्भ—एक स्त्री और वर का वार्तालाप।

सोने मउरि लागि रूसेले कवन दुलहा,

कीनि बाबा हो, हमसे सोने के मउरिया।।1।।

तहरा ही ससुर जी के सकेत बाड़ी गलिया,

दुटि जइहें हो बाबू, सोने के मउरिया।।2।।

हमरा ही बाड़ी बहिनी, बाड़ा गिहथनियाँ

जोड़ि दीहें बाबा, सोने के मउरिया।।3।।

एक स्त्री कहती है—सोने के मौर के लिए वर नाराज़ है। वह अपने पिता से

कहता है कि ‘‘हे पिताजी! मेरे लिए स्वर्णनिर्मित मौर खरीद दीजिए''।।1।।

एक स्त्री वर से कहती है—‘‘तुम्हारे ससुर जी के घर की गली सँकरी है, उसमें तुम्हारा सोने का मौर टूट जाएगा।।2।।

वर उसे उत्तर देता है—हमारी बहिन बड़ी गृहस्थिनी है, वह टूटे मौर को जोड़ देगी।।3।।

स्रोत :
  • पुस्तक : हिंदी के लोकगीत (पृष्ठ 94)
  • संपादक : महेशप्रताप नारायण अवस्थी
  • प्रकाशन : सत्यवती प्रज्ञालोक
  • संस्करण : 2002

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