Font by Mehr Nastaliq Web

नज़र बचावहीं सबहिं की

nazar bachawhin sabahin ki

जमाल

जमाल

नज़र बचावहीं सबहिं की

जमाल

और अधिकजमाल

    नज़र बचावहीं सबहिं की, परसत नायन पाँव।

    झुकि-झुकि कछु कानन कहति, कह जमाल यह काँय॥

    सामान्य अर्थ : वह नायिका सबकी आँख बचाकर, नाइन के पाँव छूकर, झुककर उसके कानों में क्या कहती है ?

    गूढ़ार्थ : नाइन को दूती बनाकर संदेश भेजना चाहती है।

    स्रोत :
    • पुस्तक : जमाल दोहावली (पृष्ठ 52)
    • संपादक : महावीर सिंह गहलोत
    • रचनाकार : जमाल
    • प्रकाशन : पुस्तक भवन काशी

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY