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जय जय श्री नरसिंह हरी
जय जय श्री नरसिंह हरी।जय जगदीस भगत भय मोचन खंभ फारि प्रकट करुना करी॥
परमानंद दास
ब्रज में श्री विट्ठलनाथ बिराजैं
ब्रज में श्री विट्ठलनाथ बिराजैं।जाकौ परम मनोहर श्री मुख, देखत ही अघ भाजैं॥
छीतस्वामी
श्री गुरु पद नख वंदना
‘प्रीतम’ अनंद नाम श्री गुरु श्री ‘विट्ठलेश’,रटों नि सियाम करौं पद नख वंदना॥
यमुना प्रसाद चतुर्वेदी
जय श्री जमुने कलिमल-तारिनि
जय श्री जमुने कलिमल-तारिनि।करु करुना प्रीतम की प्यारी भँवर तरंग मनोहर धारिनि॥
जुगलप्रिया
श्री यमुना वंदना
अडौ खडौ द्वार पै निबारियै श्री यमुने‘प्रीतम’ मनोरथन पूरन करन बेगि
यमुना प्रसाद चतुर्वेदी
श्री राधा वंदना
श्री राधा सर्वेश्वरी, राधा सरबस ग्यान।रसिकन निधि राधा हिये, राधा रसिकन प्रान॥
यमुना प्रसाद चतुर्वेदी
श्री गणेश वंदना
‘प्रीतम’ कविंद छंद रचना सुरुचि रचि,गाबै गौरि सुत श्री गजानन की वंदना॥
यमुना प्रसाद चतुर्वेदी
बलि जैहों श्री रसिकाचारज
बलि जैहों श्री रसिकाचारज।नित बिहार उद्धार कियो जिन, मथिकै हृदय-सिंधु वर बारज॥
भगवत रसिक
श्री गोकुल में प्रगट बिराजै
छीतस्वामी
श्री विट्ठलनाथ गोकुल-भूप
श्री विट्ठलनाथ गोकुल-भूप।भक्त-हित कलिजुग कृपा करि धरे प्रगट स्वरूप॥
चतुर्भुजदास
श्री बंसीअलि प्रान हमारे
श्री बंसीअलि प्रान हमारे।हृदय-कमल-संपुट करि राखूँ, अँखियन के बर तारे॥
अलबेलीअलि
श्री गुरु-गोपाल वंदना
सेवों श्री विट्ठलेश गुरु की चरण रज,सरन प्रतिपाल गोपाल पद बंदों मैं॥
यमुना प्रसाद चतुर्वेदी
लाड़िले श्री वल्लभ राजकुमार
लाड़िले श्री वल्लभ राजकुमार।बलि बलि जाऊं मुखारबिंद की, सुंदर अति सुकुमार॥
छीतस्वामी
श्री वल्लभनंदन की बलि जाऊं
श्री वल्लभनंदन की बलि जाऊं।जो गोवर्धन बसत निरंतर, गोकुल जिनकौ गाऊं॥
छीतस्वामी
घाट पर ठाढ़े श्री मदन गोपाल
घाट पर ठाढ़े श्री मदन गोपाल।कौन जुगती कर भरों जमुना चल पर्यो हमारे ख्याल॥
परमानंद दास
श्री बन मन हीं मन में भावत
श्री बन मन हीं मन में भावत।कहत न बनत, बनत वह देखत, कोउ सुकृती रस पावत॥