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राधाजू को जन्म भयो सुनि माई
राधाजू को जन्म भयो सुनि माई।सुकल पच्छ निसि आठें घर घर होत बधाई॥
परमानंद दास
मेरो मन गह्यौ माई मुरली कौ नाद
मेरो मन गह्यौ माई मुरली कौ नाद।आसन पौन ध्यान नहिं जानौ कौन करै अब बाद बिबाद॥
परमानंद दास
माई, को मिलिबै नन नंदकिसोरै
माई, को मिलिबै नन नंदकिसोरै।एक बार को नैन दिखावै मेरे मन के चोरै॥
परमानंद दास
देखौ माई! कान्ह हिलकियनि रोवै
जब-जब बंधन छोरायौ चाहतिं, सूर कहै यह को वै।मन माधौ तन, चित गोरस में, इहिं बिधि महरि बिलोवै॥
सूरदास
वीभत्स रस में ईश्वर-स्तुति
कितै मच्छ औ कच्छ की तुच्छ देही।कितै केहरी कोल है रक्त-नेही॥
शिवकुमार केडिया 'कुमार'
हिंडोरे माई, झूलत गिरिधर लाल
हिंडोरे माई, झूलत गिरिधर लाल।संग राजत वृषभानु-नंदिनी अंग-अंग रूप रसाल॥
नंददास
माधौ माई मधुवन छाये
हरित बरन बन सकल दुम पातें मारग बाढ़ी कीच।जल पूरति रथ को गम नाहीं बैरिन जमना बीच॥
परमानंद दास
जसोदा बरजत काहे न माई
तब अपने कर सौं गहि कै हौं तुम ही पै ले आई।परमानंद भाग्य गोपी को प्रकट प्रेम निधि पाई॥
परमानंद दास
माई तेरो कान्ह कौन अब ढंग लाग्यौ
पांच बरस को स्याम मनोहर ब्रज में डोलत नांगो।परमानंद दास को ठाकुर कांधे पयो न तागों॥
परमानंद दास
यह तो भाग्य पुरुष मेरी माई
यह तो भाग्य पुरुष मेरी माई।मोहन को गोदी में लिये जेमत हैं नंदराई॥
परमानंद दास
गोविंद माई मांगत है दधि रोटी
मदन गोपाल श्यामघन सुंदर छांडो यह मटि खोटी।परमानंददास को ठाकुर हाथ लकुटिया छोटी॥
परमानंद दास
कैसे जल जाऊ मै पनघट जाऊँ
कैसे जल जाऊ मै पनघट जाऊँ।होरी खेलत नन्द लाड़िलो क्यों कर निबहन पाऊं।
रसिकबिहारी
माई री, कमलनैन स्यामसुंदर
माई री, कमलनैन स्यामसुंदर, झूलत है पलना॥बाल-लीला गावत, सब गोकुल की ललना॥