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लघु गुरु समझ धर रे
लघु गुरु समझ धर रे, ज्यौं कहे ग्रंथन गुरुन प्रमान।जेही लघु तेही गुरु, लघु गुरु विवेक अक्षर लख,
गोपाल
पिछवारें व्हे बोल सुनायो री
पिछवारें व्हे बोल सुनायो री ग्वालन। कमल नैन प्यारो करतकलेऊ कोर न मुखलों आयो।
परमानंद दास
मैया री मैं गाय चरावन जैहौं
मैया री मैं गाय चरावन जैहौं।तू कहि महर नंद बाबा सौं बड़ौ भयो न डरैहौं॥
परमानंद दास
पीव घरि आवे रे
पीव घरि आवे रे बेदन माह्नी जांणी रे।बिरह संतापै कवण परि कीजै कहूँ छूँ दुखनीं कहांणी रे॥
दादू दयाल
रे निरमोही, छबि दरसाय जा
रे निरमोही, छबि दरसाय जा।कान चातकी स्याम-बिरह-घन, मुरली मधुर सुनाय जा॥
ललितकिशोरी
धीरे झूलो री राधा प्यारी जी
धीरे झूलो री राधा प्यारी जी।नवल रंगीली सबै झुलावत गावत सखियाँ सारी जी।
रसिकबिहारी
जिय की साध जिय ही रही री
जिय की साध जिय ही रही री।बहुरि गोपाल देखन न पाए बिलपति कुंज अहीरी॥
परमानंद दास
सुण रे क़ाज़ी सुण रे मुल्ला
सुण रे क़ाज़ी सुण रे मुल्ला, सुणियो लोग लुगाई।नर निरहारी एकलवाई, जिन यो रा फरमाई॥
जांभोजी
रुम-झुम भरि आये री नयना तिहारे
रुम-झुम भरि आये री नयना तिहारे।बिथुरी सी अलकैं स्याम घन सी लागत,
तानसेन
तोको पीव मिलैंगे घूँघट के पट खोल रे
तोको पीव मिलैंगे घूँघट के पट खोल रे।घट घट में वही साँई रमता, कटुक बचन मत बोल रे।