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सुन्दर पर्बत उड़ि गये
सुन्दर पर्बत उड़ि गये, रुई रहो थिर होइ।बाव बज्यौ इंहिं भांति कौ, क्यौं करि मांनै कोइ॥
सुंदरदास
बात-झूलि रे सुमन यों
बात-झूलि रे सुमन यों, निज श्री-भूलि न फूलि।काल कुटिल कौ कर निरखि, मिलन चहत तैं धूलि॥
दुलारेलाल भार्गव
कोउक दूध रु पूत दे
कोउक दूध रु पूत दे, कर पर मेल्हि बिभूति।सुन्दर ये पाखंड किय, क्यौं ही परै न सूति॥
सुंदरदास
डेढ हजार रु एक सौ
डेढ हजार रु एक सौ, इतने होहिं अंगुष्ट।चौसठि सै अंगुली करै, मन तैं कौन संपुष्ट॥
सुंदरदास
तुका दास तिनका रे
तुका दास तिनका रे, राम भजन नित आस।क्या बिचारे पंडित करो रे, हात पसारे आस॥
संत तुकाराम
रे मन रीति विचित्र यह
रे मन रीति विचित्र यह, तिय नैना के चेत।विष काजर निज खाय के, जिय औरन के लेत॥
रसलीन
लसत लाल डोरे रु सित
लसत लाल डोरे रु सित, चखन पूतरी स्याम।प्यारी तेरे दृगन में, कियो तिहूँ गुण धाम॥
बैरीसाल
जागो रे अब जागो भैया
जागो रे अब जागो भैया, सिर पर जम की धार।ना जानूँ कौने घरी, केहि ले जैहै मार॥
मलूकदास
जगत बिडाणो रे मनां
जगत बिडाणो रे मनां, क्यों जलतो आग बिछोह।पीपा साँच पिछाण ले, तज दे माया मोह॥
संत पीपा
सुआरथ के सब मीत रे
सुआरथ के सब मीत रे, पग-पग विपद बढ़ाय।पीपा गुरु उपदेश बिनुं, साँच न जान्यो जाय॥
संत पीपा
हेली तिल तिल कंत रै
हेली तिल तिल कंत रै, अंग बिलग्गा खाग।हूँ बलिहारी नीमड़ै, दीधौ फेर सुहाग॥