आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "soor sahitya sudha ebooks"
Doha के संबंधित परिणाम "soor sahitya sudha ebooks"
सूर न पूछे टीपणौ
सूर न पूछे टीपणौ, सुकन न देखै सूर।मरणां नू मंगळ गिणे, समर चढे मुख नूर॥
कविराजा बाँकीदास
सुन्दर सूर न ग्रासणा
सुन्दर सूर न गांसणा, डाकि पडै रण मांहिं।घाव सहै मुख सांमही, पीठि फिरावै नांहिं॥
सुंदरदास
सूर समर करनी करहीं
सूर समर करनी करहीं, कहि न जनावहिं आप।विद्यमान रिपु पाइ रन, कायर करहिं प्रलाप॥
तुलसीदास
सुंदर सद्गुरु शशिमयी
सुंदर सद्गुरु शशिमयी, सुधा श्रवै मुख द्वार।पोष देत हैं सवनि कौं, प्रगटे पर उपकार॥
सुंदरदास
द्वैज-सुधा दीधिति-कला
द्वैज-सुधा दीधिति-कला, वह लखि, दीठि लगाइ।मनौ अकास-अगस्तिया, एकै कली लखाइ॥
बिहारी
साजन सावन-सूर-सम
साजन सावन-सूर-सम, और कछू देखैं न।तुव दृग-दुति-कर-निकर, किय अंध बिंदुमय नैंन॥
दुलारेलाल भार्गव
लई सुधा सब छीनि विधि
लई सुधा सब छीनि विधि, तुव मुख रचिवे काज।सो अब याही सोच सखि, छीन होत दुजराज॥
बैरीसाल
सुधा लहर तुव बाँह के
सुधा लहर तुव बाँह के, कैसे होत समान।वा चखि पैयत प्रान को, या लखि पैयत प्रान॥
रसलीन
भलै सुधा सींचौ तहाँ
भलै सुधा सींचौ तहाँ, फलु न लागि है कोय।जहाँ बाल-बिधवान कौ, अश्रु-पात नित होय॥
वियोगी हरि
सुधा भरयो ससि सब कहैं
सुधा भरयो ससि सब कहैं, नई रीति यह आहि।चंद लगै जु चकोर ह्वै, बिस मारत क्यों ताहि॥
जसवंत सिंह
सुखरासी सुधि ना रही
सुखरासी सुधि ना रही, लखि के मुख सुख रासि।रस लेते रस बीखयों, पनघट भइ उपहासि॥
दयाराम
सूधि माहिं बरतै सदा
सूधि माहिं बरतै सदा, और न जानहिं रंच।सुन्दर ऐसै संतजन, जिनि कै कछु न प्रपंच॥
सुंदरदास
सुन्दर काढै सोधि करि
सुन्दर काढै सोधि करि, सद्गुरु सोनी होइ।शिष सुवर्ण निर्मल करै, टांका रहै न कोइ॥
सुंदरदास
साधु गये पर घर दिये
साधु गये पर घर विषे, गुनवर ऊपर कानि।अमृतपूर समि सूर के, मंडल में अति हानि॥