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सूर समर करनी करहीं

soor samar karni karhin

तुलसीदास

तुलसीदास

सूर समर करनी करहीं

तुलसीदास

और अधिकतुलसीदास

    सूर समर करनी करहीं, कहि जनावहिं आप।

    विद्यमान रिपु पाइ रन, कायर करहिं प्रलाप॥

    शूरवीर युद्ध में काम करके दिखाते हैं, मुँह से बातें बना कर अपनी बड़ाई नहीं करते। इसके विपरीत कायर पुरुष युद्ध में शत्रु को सामने देखकर बकवाद करने लगते हैं। भाव यह है कि वीर पुरुष काम करके दिखाते हैं, बातें नहीं बनाते और नीच पुरुष बातें तो बढ़कर बनाते हैं पर काम के समय भाग जाते हैं।

    स्रोत :
    • पुस्तक : पुष्प-पराग (पृष्ठ 89)
    • संपादक : टेकचंद शास्त्री
    • रचनाकार : तुलसीदास
    • प्रकाशन : भारती सदन, दिल्ली
    • संस्करण : 1955

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