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जे नर प्राणी लय गता
जे नर प्राणी लय गता, सांई गत है जाइ।जे नर प्राणी लय रता, सो सहजै रहै समाइ॥
दादू दयाल
प्राणी तो जिभ्या डिगा
प्राणी तो जिभ्या डिगा, छिन-छिन बोल कुबोल।मन के घाले भरमत फिरे, कालहिं देत हिंडोल॥
कबीर
प्रानी राम न चेतई
प्रानी राम न चेतई, मद माया के अंध।कहु नानक हरि भजन बिनु, परत ताहि जम फंद॥
गुरु तेग़ बहादुर
जो प्रानी ममता तजै
जो प्रानी ममता तजै, लोभ मोह अहँकार।कह नानक आपन तरै, औरन लेत उद्धार॥
गुरु तेग़ बहादुर
जो प्रानी निसि दिनि भजै
जो प्रानी निसि दिनि भजै, रूप राम तिह जानु।हरि जन हरि अंतरु नहीं, नानक साची मानु॥