आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "rajasthani ghazal sangrah part 108 109 ebooks"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "rajasthani ghazal sangrah part 108 109 ebooks"
आवाज़ें-109
अंतोनियो पोर्चिया
गेही संग्रह परिहरै
गेही संग्रह परिहरै, संग्रह करै विरक्त।हरि-गुरु-द्रोही जानिए, आज्ञा तें बितिरिक्त॥
भगवत रसिक
राजस्थानी लोकगीत : घोड़ी
घोडी पग मोड़े झांझर बाजे।घोड़ी गई ओ जोसीड़ारी हाट, वारी जाऊँ ओ नारायणगढ़ रो सेवरो।
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "rajasthani ghazal sangrah part 108 109 ebooks"
अन्य परिणाम "rajasthani ghazal sangrah part 108 109 ebooks"
राजस्थानी लोकगीत : रामदेवजी
कोठे तो बाज्या ओ अजमलजी रा छावा बाजिया।वारी जाउँ, कोठे तो घुर्या छै निसाण,
राजस्थानी लोकगीत : नारंगी
माली का रे खिड़की खोल भंवर उभा बारणै।आओ कँवरां बैठो नी पास, कांई तो कारण आया?
सकल वस्तु संग्रह करै
सकल वस्तु संग्रह करै, आवै कोउ दिन काम।बखत परे पर ना मिलै, माटी खरचे दाम॥
गिरिधारन
राजस्थानी लोकगीत : शूरा तो रण में भूझिया
ज्ञान के संग्रह में प्रज्ञा का अस्तित्व
ज्ञान के संग्रह में प्रज्ञा का अस्तित्व नहीं है।
जे. कृष्णमूर्ति
मन साधारणतः
मन साधारणतः प्रकृति में से संग्रह करता है, साहित्य मन में से संचय करता है।
रवींद्रनाथ टैगोर
देश के लिए
देश के लिए आवश्यक धान्य का संग्रह सदा रहे, स्वराज्य की आर्थिक नीति इस तरह बनाई जानी चाहिए।
महात्मा गांधी
टिकटों का संग्रह
“तीन वर्ष पहले मेरी पत्नी की मृत्यु हुई थी। उस दिन मुझे कितना क्लेश हुआ। यह
कारेल चापेक
जगत से मन
रवींद्रनाथ टैगोर
अन्य बहुत से शास्त्रों का
वेदव्यास
वंचना से धन का संग्रह कर
वंचना से धन का संग्रह कर उसकी रक्षा करना, कच्चे घड़े में जल भर कर उसकी रक्षा करने के समान होता है।
तिरुवल्लुवर
मूल्य आज संपदा और सत्ता के संग्रह
मूल्य आज संपदा और सत्ता के संग्रह का बना हुआ है। धर्म अब वह है जो