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सुरत लाई आरत सरधा धार

surat lai aarat sardha dhaar

संत शिवदयाल सिंह

अन्य

अन्य

संत शिवदयाल सिंह

सुरत लाई आरत सरधा धार

संत शिवदयाल सिंह

और अधिकसंत शिवदयाल सिंह

    सुरत लाई आरत सरधा धार।

    उमंग-उमंग गुरु चरनन लागी, सत संगियन में बाढ़ा प्यार॥

    आरत सामाँ सजे बनाई, अनेक पदारथ घरे सम्हार।

    प्रेमी जन मिल आरत गावे, घंटा संख धूम अति डार॥

    गगन मंडल में बजी बधाई, हुए प्रसन्न अब गुरु दयार।

    राधास्वामी दया बिचारी, दिया मोहिं निज चरन अधार॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : प्रेमप्रकाश (पृष्ठ 6)
    • रचनाकार : राधास्वामी सहाय
    • प्रकाशन : राधास्वामी सत्संग इलाहाबाद

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