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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

यह एक सर्वविदित मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि जो लोग दूसरों को गाली देने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं, वे दूसरों की थोड़ी सी भी आलोचना सहन नहीं कर पाते।