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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

यदि तीर्थ स्थान में भी; एक दिन के लिए लोगों की पाप प्रवृत्ति पर नियंत्रण नहीं किया जा सकता, तब समझो कि दोष तुम्हारा है, उनका नहीं।