श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण
यदि मंगल चाहते हो तो ज्ञानाभिमान छोड़ो, सभी की बातें सुनो और वही करो, जो तुम्हारे हृदय के विस्तार में सहायता करे।
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