उमर ख़य्याम के उद्धरण
यदि इस संसार में आना मेरे अधिकार में होता तो मैं न आता। और यदि जाना मेरे हाथ में होता तो मैं क्यों जाता? इस से बढ़कर कोई बात न होती कि मैं इस ऊजड़ संसार में न आता, न रहता, और न जाता।
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