कुबेरनाथ राय के उद्धरण
विज्ञान वहीं तक सक्रिय है जहाँ तक गिना जा सकता है या मापा जा सकता है या तौला जा सकता है। संख्यावाचक और परिमाणवाचक सृष्टि के परे, गुणवाचक सृष्टि में, भाववाचक सृष्टि में, यह पंगु है, किंकर्तव्यविमूढ़ है।
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