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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

विचार मंच की स्थापना दो तरह से होती हैं : कोई विचारक हो तो उसके नाम से विचार मंच इसलिए बनता है, ताकि उसके विचारों के आधार पर उसके अनुयायी विचार करेंगे। दूसरे कोई विचारहीन हो; लेकिन दूसरे कारणों से मशहूर हो, तो इसलिए विचार मंच की स्थापना होती है कि उसने तो विचार नहीं किया, मगर बाक़ी लोग विचार करें।