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वात्स्यायन के उद्धरण

वर (पति) तीन रात वधू के प्रति प्रेम प्रदर्शित करे और उसमें विश्वास उत्पन्न करे; किन्तु ब्रह्मचर्य भंग न करें और नववधू के प्रति प्रेम प्रदर्शित करते हुए ज़बर्दस्ती कोई काम न करे।