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दुर्गा भागवत के उद्धरण

उत्कृष्ट योद्धा अनुशासनप्रिय होता है और इसी अनुशासन ने अश्वत्थामा को निगल लिया।

अनुवाद : वासंतिका पुणतांबेकर