Font by Mehr Nastaliq Web

वात्स्यायन के उद्धरण

तिर्यग्योनि अर्थात् पशु-पक्षियों में स्त्री जाति के अनावृत अर्थात् लज्जा, भय आदि से उन्मुक्त होने के कारण, ऋतुकाल में ही वह रतिक्रिया में प्रवृत्त होती है और तृप्त हो जाती है। अतः रतिक्रिया में प्रवृत्ति होने से तथा विवेकहीन (बुद्धिहीन एवं अज्ञ) होने से, पशु-पक्षियों में काम-प्रवृत्ति के लिए उपायों की अपेक्षा नहीं होती।