स्वयं अपनी इच्छा से स्वीकृत युगदीर्घ बंधनों को काट देने के लिए हमें संसार भर की अनुमति लेने का न अवकाश है, न आवश्यकता। परंतु इतना ध्यान रहना चाहिए कि बेड़ियों के साथ ही उसी अस्त्र से बंदी यदि पैर भी काट डालेगा, तो उसकी मुक्ति की आशा दुराशा मात्र रह जावेगी।