Font by Mehr Nastaliq Web

वात्स्यायन के उद्धरण

सुगृहिणी को मदिरा, आसव आदि के पात्रों, सुराहियों को संभालकर रखना और समय पर उनका उपयोग करना, क्रय-विक्रय करना तथा आय-व्यय (हानि-लाभ) का निरीक्षण करना चाहिए।