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भीमराव आंबेडकर के उद्धरण

शूद्र को रचयिता के पाँवों के समकक्ष रखा गया है। मानव शरीर में पैर ही सबसे नीचे और सबसे हेय होते हैं; चुनांचे, शूद्र को सामाजिक व्यवस्था में भी सबसे निचली पायदान दी जाती है, उसे सेवक या टहलुआ के रूप में काम करने का सबसे हीन काम मिलता है।

अनुवाद : योगेंद्र दत्त