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वात्स्यायन के उद्धरण

सवर्णा, अनन्यपूर्वा कन्या से शास्त्र-विधि के अनुसार विवाह करने पर धर्म, अर्थ, संबंध (प्रीति), वंश की वृद्धि और अकृत्रिम (स्वाभाविक) रति की प्राप्ति होती है।