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नामवर सिंह के उद्धरण

साफ शब्दों में, रूपवादी बहुत कुछ उस बतकहे की तरह है जिसमें बात करने का कौशल तो खूब हो, परन्तु कहने के लिए कोई महत्त्वपूर्ण बात न हो और उसके साथ घंटे-दो घंटे बात करने के बाद भी कुछ हासिल न हो। दुर्भाग्य से, वे कवि नहीं हैं।