राधावल्लभ त्रिपाठी के उद्धरण
संस्कृत का कोई भी ऐसा महाकवि नहीं है, जिस पर किसी-न-किसी रूप में रामायण तथा महाभारत का प्रभाव न हो। कालिदास के तो रोम-रोम में वाल्मीकि रमे हुए हैं।
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