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हजारीप्रसाद द्विवेदी के उद्धरण

संसार में अच्छी बात कहने वालों की कमी नहीं है; परंतु मनुष्य के सामाजिक संगठन में ही कहीं कुछ ऐसा बड़ा दोष रह गया है, जो मनुष्य को अच्छी बात सुनने और समझने से रोक रहा है।