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वात्स्यायन के उद्धरण

संपूर्ण विद्याओं को प्राप्त न करने वाला अर्थात् विद्या के एक क्षेत्र का ज्ञाता, कौतुक-क्रीड़ा में कुशल, अत्यंत विश्वनीय 'विदूषक' कहलाता है। हास्यरस में कुशल होने के कारण वह 'वैहासिक' भी कहलाता है।