Font by Mehr Nastaliq Web

राधावल्लभ त्रिपाठी के उद्धरण

सामंतीय परिवेश की संपूर्ण विभीषिका हमारे सामने उस समय उपस्थित होती है, जब कौशल्या राम पर अपनी आशंकाएँ व्यक्त करने लगती हैं।