साहित्य की ख़ूबी व्यंजना में, लक्षणा में है, सुझाने में है—आज्ञा में नहीं है, साक्षात् उपदेश में नहीं है। जहाँ साक्षात् उपदेश होता है, वहाँ वह परिणाम नहीं करता। जहाँ अप्रत्यक्ष उपदेश होता है, सुझाते हैं, साक्षात् आज्ञा नहीं करते, 'सजेस्टिव ' होता है—वहाँ वह सर्वोत्तम साहित्य माना जाता है।