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विश्वनाथ त्रिपाठी के उद्धरण

रामानंद ने सामंती व्यवस्था की प्रमुख सामाजिक विशेषता, जाति प्रथा को—जिससे नारी पराधीनता की समस्या भी जुड़ी है—भक्ति के लिए व्यर्थ और अस्वीकार्य बना दिया।यह उनका और भक्ति आंदोलन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण योगदान है।