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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

राजसत्ता, अर्थसत्ता और धर्मसत्ता, जब बहुजन समाज को यथास्थिति में रखना चाहते हैं, शोषण की परंपरा को बनाए रखना चाहते हैं—तब यह काम ख़ुदा या भगवान के मारफ़त, भगवान के नाम से करते हैं।