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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

पुस्तकालयों पर सभी की नज़र रहती है—ठीक वैसी ही जैसी किसी अजायबघर पर। बाहर से कोई आया तो हम अपने वाचनालय और पुस्तकालय दिखला देते हैं, ताकि उन्हें विश्वास हो कि हमारा बौद्धिक स्तर क्या है।