पुरुष को यदि ऐसे वृक्ष की उपमा दी जाए; जो अपने चारों ओर के छोटे-छोटे पौधों का जीवन-रस चूस-चूस कर आकाश की ओर बढ़ता जाता है, तो स्त्री को ऐसी लता कहना होगा, जो पृथ्वी से बहुत थोड़ा-सा स्थान लेकर; अपनी सघनता में बहुत-से अंकुरों को पनपाती हुई, उस वृक्ष की विशालता को चारों ओर से ढक लेती है।