हरिशंकर परसाई के उद्धरण
प्रजातंत्र में जैसे सब बराबर होते हुए, शासक वर्ग उत्तरदाई होता है, वैसे ही पाठक और लेखक बराबर होते हुए भी लेखक उत्तरदाई है—अपने पाठकों के निर्माण के लिए, उनके विचारों के लिए और उनकी रुचि के लिए।
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