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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

प्रेम की ग़ैररूमानी प्रक्रिया यह है—किसी व्यक्ति के संदर्भ में शरीर की कुछ ग्रंथियाँ एक रस निसृत करती हैं, जिससे सेक्स-भावना जागती है और उस व्यक्ति से भावनात्मक लगाव होता है।