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कुँवर नारायण के उद्धरण

प्रत्येक युग का एक विशिष्ट यथार्थ-बोध होता है, जो न केवल अपने युग को नई तरह सोचता-समझता, बल्कि अतीत का भी पुनर्मूल्यांकन उसी के आधार पर करता है। इसी यथार्थ-बोध पर उस युग का रचनात्मक स्वभाव (क्रिएटिव टेंपर) निर्भर करता है।