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कृष्ण बिहारी मिश्र के उद्धरण

प्रत्येक वन में वृक्षों के फल बिना यत्न से यथेच्छ मिल जाते हैं। पवित्र नदियों का शीतल व मधुर जल स्थान-स्थान पर मिलता है। सुललित लतापल्लवमयी कोमल शय्या सर्वत्र सुलभ है। फिर भी धनिकों के द्वार पर मूर्ख याचक क्यों संताप सहन करते हैं?