प्रथम समागम में नायिका और कन्या, लज्जा से अपनी आँखों को मूँद लेती है। ऐसे में नायक को धीरे-धीरे मीठी बातें करते हुए, उसके अंगों को सहलाना चाहिए और नीवी की गाँठ ढीली कर; अंगों का यथाविधि स्पर्श, मर्दन, चुंबन, और आलिंगन करना चाहिए। इसके उपरांत नायिका में विश्वास उत्पन्न कर, उसे संभोग के लिए तैयार करना चाहिए ।