पति पत्नी को चौंसठ कलाओं की शिक्षा दे, उसके प्रति अपने अनुराग को प्रदर्शित करे और पहले मनोरथों, अभिलाषाओं और कल्पनाओं की चर्चा करे तथा 'भविष्य में जीवन भर मैं तुम्हारे अनुकूल रहूँगा, तुम्हारे कहने पर चलूँगा' इस प्रकार की प्रतिज्ञा भी करे और सपत्नियों (सौतों) के भय को दूर करे तथा यथासमय कन्याभाव से मुक्त युवती पत्नी के साथ बिना उद्विग्न किए रतिक्रीड़ा का उपक्रम करे।