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वात्स्यायन के उद्धरण

निरंतर मायके में रहने वाली, जिसके संतान पैदा होकर मर जाते हो, जो गोष्ठियों में निरंतर भाग लेती हो, जो पुरुष के साथ मेल-जोल बढ़ाने वाली हो, नट या अभिनेताओं की पत्नियाँ, बाल-विधवा स्त्री, दरिद्र होकर वैभव की इच्छा करने वाली, जिसके बहुत से देवर हों, जो अपने रूप एवं सौंदर्य के अभिमान में पति को हीन समझती हो, अपने कला-कौशल पर अभिमान करती हो और पति की मूर्खता से क्षुब्ध हो, जो लोभ से पति से उद्विग्न होकर दूसरे को चाहती हो—ये स्त्रियाँ सहज सिद्ध हो जाती हैं।