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वात्स्यायन के उद्धरण

नीचरत में अर्थात् वड़वा नायिका का शश पुरुष के साथ और हस्तिनी नायिका का वृष पुरुष के साथ, संभोग करने पर पुरुष-लिंग के छोटा होने से यदि नायिका की तृप्ति नहीं होती हो, तो उसे अपनी कामवासना की तृप्ति के लिए लोहा, लकड़ी आदि के बने हुए कृत्रिम लिंगों का प्रयोग करना चाहिए।