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वात्स्यायन के उद्धरण

न तो अधिक अनुकूल (वशंगत) बनकर और न अधिक प्रतिकूल रहकर नवोढ़ा कन्या को वश में किया जा सकता है। इसलिए मध्यम मार्ग के द्वारा उसे वश में करना चाहिए।