Font by Mehr Nastaliq Web

वात्स्यायन के उद्धरण

मिलने-जुलने वाले नायक को चाहिए कि उसे स्त्री की चेष्टाओं एवं प्रवृत्तियों की भली-भाँति सूक्ष्मता से परीक्षा कर लेनी चाहिए और उसके मनोभावों की भी परीक्षा कर लेनी चाहिए, क्योंकि भाव ही चेष्टा के कार्य हैं।