Font by Mehr Nastaliq Web

हरिशंकर परसाई के उद्धरण

मनुष्य ने अपनी स्वाभाविक स्वतंत्रता को त्यागकर; राज्य के हाथ में जो अपने-आपको समर्पित कर दिया है, तो इसीलिए तो कि वह उसे खाना, कपड़ा, निवास और काम तो कम-से-कम देगा ही—पर वह उसे उपदेश ही देता है।