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महादेवी वर्मा के उद्धरण

मनुष्य को समूह बनाकर रहने की प्रेरणा पशु-जगत् के समान प्रकृति से मिली है, इसमें संदेह नहीं; परंतु उसका क्रमिक विकास विवेक पर आश्रित है, अंध प्रवृत्तिमात्र पर नहीं।